बहू को जिंदा जलाने मे क्या मजा है , ये एक सास ही बता सकती है ।
जिंदा किसी लड़की पर ये ही आग लगा सकती है ।
ये एक सास ही भूल सकती है की वो भी एक नारी है , फिर भी कितनी अत्याचारी है .
बहू के आँसूओ पर हँसी उसे आती है और बेटी की रोनी सूरत आंख उसकी भर जाती है ।
ये एक सास ही हो सकती है जिसे बहू और बेटी मे इतना फर्क नजर आता है की एक इनके हाथों से अमरित तो दूसरा जहर पाता है ॥