रविवार, 4 सितंबर 2011

साससास

बहू को जिंदा जलाने मे क्या मजा है , ये एक सास ही बता सकती है ।
जिंदा किसी लड़की पर ये ही आग लगा सकती है ।
ये एक सास ही भूल सकती है की वो भी एक नारी है , फिर भी कितनी अत्याचारी है .
बहू के आँसूओ पर हँसी उसे आती है और बेटी की रोनी सूरत आंख उसकी भर जाती है ।
ये एक सास ही हो सकती है जिसे बहू और बेटी मे इतना फर्क नजर आता है की एक इनके हाथों से अमरित तो दूसरा जहर पाता है ॥

2 टिप्‍पणियां:

  1. सार्थक प्रस्तुति, आभार.

    पधारें मेरे ब्लॉग meri kavitayen पर भी, मुझे आपके स्नेहाशीष की प्रतीक्षा है.

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